Saturday, May 2, 2009

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दावा जानके खाया होगा

दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे
अश्क़ आँखों ने पिए और ना बहाए होंगे
बंद कमरे में जो खत मेरे जलाए होंगे
एक एक हर्फ जबिन पर उभर आया होगा
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा

उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी
दिल की लुटती हुई दुनिया नज़र आई होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटायी होगी
हर तरफ मुझको तडप्ता हुआ पाया होगा
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा

छेड की बात पे अरमान मचल आए होंगे
गम दिखावे की हँसी में उबल आए होंगे
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आए होंगे
सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा

ज़ुलफ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी
और भी गम की घटा मुखड़े पे छायी होगी
बिजली नज़रों ने कई दिन ना गिराई होगी
रंग चेहरे पे कई रोज़ ना आया होगा
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दावा जानके खाया होगा

3 comments:

  1. nice but dil ko chu jaye,aisi baat nhi lagi

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  2. It depends buddy, what your criteria of loving and memorizing someone, I like this and it's lyrics are just amazing. It really hurt when you listen this song remembering someone who was very close to you, and then you'll feel the exact feeling, Dil ko choo lene wali feeling.

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  3. We have a saying in Hindi "Maano to Shaligram, nahin to pat_thar." That's the story with songs. They are all just idle words, until it happens to you.
    Most love songs would sound to you like just so much crap, until you fall in love yourself - and then each song makes so much sense that it touches you right in your heart.

    Just the simple word "yaad" which is used to commonly in Hindi songs, (like this one also) may remind someone of trying to memorize history lessons. But only he who has loved deep and lost that love will be able to understand why the shaayar says,
    "Yaad-e-maazi azaab hai yaarab, chheen le mujhse haafiza mera."

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